ये आज़ादी यूँ ही नहीं मिली हमें,
किसी ने अपना घर-बार मिटाया था।
किसी ने जवानी देश के नाम कर दी,
किसी ने हँसकर फाँसी का फंदा अपनाया था।
Author: prity ✍🏽
गुलाबों से नहीं मिली आज़ादी हमें,
लहू का कतरा-कतरा बहाया था।
माना चरखे में थी सहनशीलता,
पर ख़ून तो भगत सिंह ने खौलाया था।
कैसे भूल जाएँ शहादत उनकी,
जिन्होंने हँसकर मौत को गले लगाया था।
भारत को अपनी माँ समझकर,
हँसते-हँसते प्राण दिए, तब जाकर तिरंगा लहराया था।
आज की आज़ादी का श्रेय देना है उन्हें,
जिन्होंने अपना सर्वस्व लुटाया था।
अंग्रेज़ों के सामने झुके नहीं कभी,
फाँसी पर चढ़कर भी अंग्रेजों को सिखाया था।
जिस मिट्टी पर हम आज़ाद खड़े हैं,
उसमें किसी माँ का लाल दफ़्न है।
जिस तिरंगे को हम आज सलाम करते हैं,
उसके हर रंग में किसी शहीद का कफ़न है।
इसलिए जब भी तिरंगा लहराओ यारों
सिर्फ़ हाथ नहीं—अपना सिर झुकाना।
जिनके लहू से मिली है आज़ादी हमे
उन शहीदों का कर्ज़ तुम कभी मत भुलाना।
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