जो बीत गए वो हसीन थे,
बीते पलो की झलकियाँ
खूबसूरत और गमगीन थे।
यादों के झरोखो में
कुछ पल है खुशी के,
जो भूला गए वो गम थे
कितने हसीन वो दिन थे।
काश !सा लगा है मन में
काश फिर वो दिन वापस आता
जब मस्ती भरी ज़िन्दगी होती
ना नौकरी का टेंशन ,
ना किसी के तानों का
ना ही कोई डर होता
मस्ती ही मस्ती हर ओर होता।
कोई ना कहता कुछ कर ले
ना खुद समझ आता की कुछ करना है,
ना द्वेष होता ना प्रतिस्पर्धा
बस जीवन की असली मौज होती,
काश वो बचपन लौटता फिर,
मस्ती ही मस्ती हर पल होती।
प्रिती कुमारी

8 टिप्पणियाँ
Nice
जवाब देंहटाएंMst h
हटाएं👌👌👌👌👌👌
जवाब देंहटाएंThnku bhai
हटाएंShare kro na apne fb pe
हटाएंNice one
जवाब देंहटाएंNicely written
जवाब देंहटाएंKash wo pal lout aaye
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