मैं कर्मयोगिनी नारी हूँ,
ना बांधो तुम जंजीरो में
मुझे नाम बहुत कमानी है,
अपनी पहचान बनानी हैं ।
कितने ही बंधन बना डालो
हर बेड़ी तोड़ती जाउंगी,
मैं कर्म पथ पर चलते - चलते
एक दिन इतिहास रच जाउंगी।
हौसला बुलंद हैं मेरा
कोई तोड़ नहीं पाएगा,
ना मापो औकाद मेरी
तेरा क्षण में भ्रम टूट जाएंगा।
हर रास्ता मुश्किल है
हर राह पे हैं कई रूकावटे,
इसे अपने अनुकुल बनाना है
नित्य कठिन परिश्रम करके।
प्राचीन सभ्यता से अभी तक
हर वक्त दबी केवल नारी है,
सती प्रथा, बाल विवाह, विधवा प्रथा
इस सब कुरीतियो ने हर क्षण
नारी को ही दबाया है।
उस बीते प्रथा को नकार करके
एक नई पहचान बनाना है
नारी पुरूषो से कम नहीं
ये सिध्य करके दिखाना है
खुद को साध्य, सामर्थ्य बनाना है
अपना गौरव बढ़ाना है ।
ये पल है कदम से कदम मिलाने का
खुद की कमी निखारने का,
ना परवाह करके दुनिया की
बिना ये सोचे लोग क्या कहेगे,
आगे बढ़ते जाना है,सान-मान बढाना है
अपना पहचान बनाना है ।
प्रीति कुमारी

10 टिप्पणियाँ
Nice di
जवाब देंहटाएंNice 👌👌👌👌👌👌👌
जवाब देंहटाएंEncouragement lines
जवाब देंहटाएंThnku so mch all of u
जवाब देंहटाएंFabulous
जवाब देंहटाएंThnku so mch
जवाब देंहटाएं👍👍👍👍👍👍
जवाब देंहटाएंThnx a lot
हटाएंVery nice yaar
जवाब देंहटाएंThnx a lot
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