अपनी घटिया औकात दिखाया हैं
क्या कहूं तुमसे वो तो अपने थे
पर बूरे वक्त में पारायापन जताया है ।
लाखों किये है हमने उनके लिए
जिसे पल भर में ही वो भूल गये
मेरे टूकड़े पर पलने वाले
मेरे वक्त बदलते ही दूर गए।
किसको अपना समझ रहा था मैं
जो रक्त -वक्त से अपने थे
मेरी ही खाते रहे और मुझे ही गैर बताते रहेे
अजमाते रहे हालातो को
और वक्त बदलते ही छोड़ गए ।
धन -दौलत सब माया है
अपना -वपना कुछ भी नहीं
सब व्यर्थ का जाया है
जो साथ रहे गरीबी में
वो ही एकलौता रिश्ता बस अपनाया है ।
खड़े थे सुनसान राह में
थे सोच में, गंभीर और चिंतित पड़े
क्या वक्त था जब लोगो के तातो से थी
आस पास थी भीर लगी
एक पैसे की कमी ने हालात सब बदल दिये
मेरी गिरती हालातो ने हर रिश्ते बेनाकाब किये।
बहुत दूर दराज के रिश्ते भी
अपना कहकर बुलाते थे
आज के बदले हालतो में
अपने भी मुँह चुराते है और
अपना कहने से डर जाते हैं
सब पैसो का माया है
वरना क्या भैया क्या मैासा -मौसी
सब इस जग में पाराया है ।
-प्रीति कुमारी

6 टिप्पणियाँ
Nice
जवाब देंहटाएंसही बात है
जवाब देंहटाएंTrue line nice
जवाब देंहटाएंThnx a lot everyone
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएं👌👌👌👌👌👌👌
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