जड़ा रूक कर सोचना,
कब तक रहेगी ये जिंदगी
ये खुद से खुद ही मौन होकर पूछना।
जलाए जाते हैं हर रोज कोई शख्सियत
यकीन ना हो तो पेपर पढ़कर देखना
फिर भी ना आए यकी तुझे तो
अपने मुहल्ले की शमशान में जाकर देखना ।
हर शख्सियत का गुरुर वही दफन मिलेगा
जिसने जन्म लिया है इस धरती पर
धधकती चीता में जल जाती है गुरूर सबकी
बचता है केवल नाम जिसने जितना जीवन में कमाया हो।
तेरे हर धड़ी का हिसाब लिख रहा है वो
तु ये ना समझ कि उससे कुछ छुपा लेगा
वो तो छलिया है सब देख रहा
पन्ने तो तब भरेगे तेरे कर्मों के
जब मिट्टी का शरीर कफन में लिपटा होगा।
अपने ही तुझे जलाएंगे
कुछ दिन चन्द आँसू बहाएंगे
उस आँसू में भी छुपा उनका स्वार्थ होगा
उनके लबों पर तेरे किये हर कर्मो का चर्चा बेहिसाब होगा।
हिसाब तो खुदा करेगा तेरे हर कर्मों का
भला का भला, बूरा का बूरा ही पायेगा
स्वर्ग -नर्ग कोई देखा तो नहीं है
पर सोच जड़ा मनुष्य जन्म पाकर भी
जो कुछ ना किया असहायो के लिए तो
खुदा को क्या मुँह दिखाएंगा
फिर खुदा को अच्छे हिसाब कैसे गिनवाएंगा।
गुरूर किस बात का है तुझे
जब जीवन ही छलावा है
जब अन्तिम यात्रा शमशान ही है तो
क्यों व्यर्थ ही पाप कमाना है
मनुष्य में हैं जन्म लिया तो
कफन से पहले असहायो के लिए कुछ जतन कर जाना है ,कुछ अच्छे कर्म कर जाना है ।
-प्रीति कुमारी

6 टिप्पणियाँ
Beautiful
जवाब देंहटाएंNice 👌👌👌👌👌
जवाब देंहटाएं100% right
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएंIf everyone read and become be honest in his own life then things will be very easy to each other for everyone and life become happily spent
जवाब देंहटाएंVery nice poet
Ji bht Sukriya 🙏❤
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