कितना बेचैन हुआ है
फिर चला हैं उसी राह पर
एै मेरे दिल थम जा ठहर जा।
सौ बार तू तोड़ा गया ,
रोता हुआ छोड़ा गया
सही है वेवफाई हर दफा
फिर भी नहीं मिली तुझे
सुकून एक भी दफा।
एै मेरे दिल क्यों कर रहा
वही खता फिर से
जिसकी सजा मिली है तुझे
हर एक दफा,
फिर ना उस राह से गुजर।
एक बार रोया था जिस लिए
उसी गलती को दोहराने चला हैं
मुहब्बत की सजा खाई थी बेरहमी से
फिर से मुहब्बत को दोहराने चला है।
दिल की गहरी दर्द में
अबकी चली अगर हवा
फिर से तू टूट जाएगा
शीशे की तरह, एै मेरे दिल।
फिर किसी से ना इश्क़ कर
फिर ना तूू उस गली से गुजर
अबकी जो टूटा तो
फिर ना संभल पाएगा
कागजो की तरह तू बिखर जाएगा
एै मेरे दिल, फिर ना किसी से इश्क़ कर।
-प्रीति कुमारी

2 टिप्पणियाँ
Nice 👌👌👌👌
जवाब देंहटाएंSuper
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