नया सवेरा

धोर अंधकार के बाद 
उम्मीद की एक किरण खिली
फिर सुबह चहुँ ओर हुआ
फिर से सपने जग उठी।

चिड़ियों की चहचहाहट ने
मुर्गियों के बानो ने
सूरज की तेज किरणों ने
फिर से आकर है उम्मीद दिया।



एक नई उम्मीद जगी हैं 
फिर हौसला समेटा हूँ 
शायद आज सब अच्छा हो
ये सोच के मन प्रफुल्लित है ।

रोज उम्मीद लगाती हूँ 
तिनका -तिनका कर इसको बढ़ाती हूँ 
फिर सुबह से शाम तक लगन करके
उसे सत्य करना चाहती हूँ ।

एक सुबह मेरा होगा 
मेरे सपने भी सच होगे
वो सुबह मेरे भी जीवन का 
सपने सब सच होगे, सपने सब सच होगे।

                              -प्रीति कुमारी 


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