संघर्ष ही जीवन है

उलझने होती नहीं
बना कर हम रखते हैं
झूठ का सहारा लेते हैं
और सच को दबाकर हम रखते हैं ।

लड़ते नहीं अपनो से कभी अपने लिए
और सरेयाम कहते हैं
किया कुछ नहीं अपनो ने हमारे लिए
उलझन मन में रखते हैं
दोष अपनो को देते हैं ।

बिना अपने लिए सोचे
कोई महान नहीं होता
होती अगर मंजिल इतनी आसान
तो कोई भी विफल -गुमनाम नहीं होता ।
नीत चलने वालो की ही जीत होती है
थक कर उठना, फिर चलना
जीवन की यही रीत होती है
बिना मेहनत कोई महान नहीं होता ।

सब कुछ अनुकूल हो
ऐसी किस्मत सबकी कहां
प्रतिकूल स्थित में जो सब कर ले
वही बने महान, उसके लिए फिर
संसार में कुछ भी नामुमकिन फिर कहां।

प्रीति कुमारी


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