तु जो चाहे तो पर्वत -पहाड़ को फोड़ दे
तु जो चाहे धरती से अंबर को जोड़ दे
अमर तेरा प्राण मिला तुझको वरदान है
तेरी आत्मा में बसा स्वंय भगवान है
मनुष्य तु बड़ा महान है।।
दर्द को संभाल ले, हर कष्ट को निवार ले
अपनो के दिये गम को भी, पल भर में बिसार ले
तु कर्म मे महान है, तेरा धर्म ही इमान है
मनुष्य तु बड़ा महान है ।।
जो चाह हो उसे पा ले तु
करे चुनौतियों को स्वीकार तु
काटों से बिछा हो राह फिर भी
मंजिल को तु खंधाल ले
तु रास्ता निकाल रे
तेरा आत्मा में बसा भगवान रे
मनुष्य तु बड़ा महान है ।।
प्रीति कुमारी

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