तुम आकर मुझे उठा लेना
अपनी बाहों की गरमी से
माँ मुझे नई उर्जा देना।
ममता तेरी जग से प्यारी माँ
सारी दुनिया इसमें छोटी हैं
यहाँ स्वार्थ की बहती नगरी हैं
माँ निस्वार्थ प्रेम तुम दे जाना।
गम खाउ जब जमाने के धोखो से
फिर प्यार तेरा याद आता हैं
तेरे प्यार के गरमाहट को
बस सोच सोच रो जाता हूँ ।
कितना उँचा उठ जाउ जीवन में
हर पथ पर मुझको तू चाहिए माँ
जग समझता है समझदार
बस तू ही समझे नादान
तेरा यही प्यार चाहिए माँ
मुझे हर पल तू चाहिए माँ ।
जब चोट खाकर जमाने से
थक जाउ़़ माँ,
अपनी थपकी से सुला देना
माँ मुझे गले से लगा लेना
तुम अपना प्यार लुटा देना।
प्रीति कुमारी

2 टिप्पणियाँ
Nice
जवाब देंहटाएंSuper
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