तेरे जद्दो जहन में
जड़ा हमे भी बताइए
आइये बैठिये हमारे पास
जरा हमे भी शुकून चाहिए ।
तेरे चाहतो को जान लू
तेरे इश्क़ को पहचान लू
खुली किताब सा है तु सनम
चाहता हूँ रूह तलक उतार लू।
तेरा प्रेम मन में अगाध है
तेरी एक हामी पर कुर्बान है
मेरी ज़िन्दगी मेरी आरजू
तू जान है, बस जान ले
आ बैठ मेरे पास जरा
और मेरीआरजू पहचान ले।
तलब -तलब की बात है
तू है मेरे निगाह में
तेरी निगाह है किसी और पर
तू चाह है मेरा सनम
तेरी चाहतो में कोई गैर है।
आ पास मेरे बैठ जा
बस तुझे देख लू निहार लू
रूह तलक उतार लू
तू हो जा भले किसी गैर का।
गम नहीं इस बात की
बस बैठ जा दो पल सही
तुझे देख लू निहार लू
तुझे रूह तलक उतार लू।
प्रीति कुमारी

1 टिप्पणियाँ
Super
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