जरूरी तो नहीं ,
मैं तुम्हें चाहूं बदले में तू भी चाहे
जरूरी तो नहीं ।
तुम दिल से ना सही
नजरों से जता दिया करना
चाहों या ना चाहों मिले जब भी नजरे
मेरे खातिर मुस्कुरा दिया करना।
चाहत पे किसकी जोड़ हैं
तेरी अदाये भी तो बेजोड़ है
अदब भी है, नजाकत भी है
प्यार भी है और इन्कार भी है ।
तेरे दिल की तो तू ही जाने
मेरे दिल पर मेरा अब जोर नहीं
इश्क़, प्यार का तो पता नहीं पर
तेरा ना होना बेचैन बहुत करता है ।
कसक तेरी लगी जब से
किसी को मुड़कर भी देखा नहीं हमने
तु मिले ना मिले नसीब मेरी
पल जो भी बीते साथ
वो भी तो कुछ कम हसीन नहीं ।
प्रीति कुमारी

1 टिप्पणियाँ
Super
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