तू चाहत बन तो गया है मेरी
तेरी जरूरत हो सी गई है इस दिल को
इससे दिल कहाँ मुकरता हैं ।
तू चाहिए इसमे तो कोई शक नहीं
पर पाने को तुझे,
खुद का मान गिरा लूं
ऐसे आशिकों में भी हम नहीं ।
तेरी बाते याद आती हैं हरपल
पर यादो पर मेरी इख्तियार नहीं
तुझे इतनी बार समझाया अपने एहसास को
फिर भी बार बार दर्द सहे इतने भी बेकार नहीं ।
कसीस बातों की छाई हैं जहनों में
वक्त के साथ ये भी मिट जाएगी
बहुत जल्द अपना बनाकर भूला दिया तुमने
कोई ना वक्त के साथ मेरी भी चली जाएगी ।
एक बात बोलू क्या दिल से
बूरा दिल को लगा है पर
दिमाग आज भी चल रहा है
वक्त बीत तो रहा है तुझ बिन पर
तेरे पर किया ऐतवार हर पल खल रहा है ।
प्रीति कुमारी


1 टिप्पणियाँ
Nice❤❤❤
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