माता पार्वती ने क्यों दिया था समुंद्र देवता को श्राप?

किस श्राप के कारण समुद्र का पानी हो गया था खारा? जानिए पौराणिक कथा 🙏



समुद्र का पानी मनुष्यों को पीने में खारा लगता है, लेकिन क्या आपको पता है कि समुद्र का पानी खारा क्यों है. इसके पीछे क्या रहस्य है. अगर आप इसके बारे में नहीं जानते हैं तो पूरी जानकारी विस्तार से पाने के लिए पढ़ें ये पौराणिक कथा, जिसमें समुद्र मंथन के अलावा आपको एक और रहस्य के बारे में पता चलेगा.
किस श्राप के कारण समुद्र का पानी हो गया था खारा? जानिए पौराणिक कथा
समुद्र का पानी खारा होने के पीछ क्या है बड़ा रहस्य?

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अगर आप समुद्र का पानी पीकर चेक करेंगे तो खारा लगेगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि समुद्र का पानी खारा क्यों है. अगर आप नहीं जानते हैं तो आपको यहां पर उसके बारे में पूरी हम पूरी जानकारी देने जा रहे हैं. किस श्राप के कारण समुद्र का पानी खारा हो गया था. इसको लेकर एक पौराणिक कथा में पूरी विस्तार से जानकारी दी गई है. जब इसके बारे में हमने अपने ज्योतिषाचार्य पंडित नारायण शुक्ला से बात की तो उन्होंने इसके बारे में एक जरूरी रहस्य बताया है.


ज्योतिषाचार्य नारायण हरि शुक्ला का कहना है कि पौराणिक कथाओं में समुद्र का भी धार्मिक महत्व बताया गया है कि समुद्र मंथन के अलावा समुद्र का जल खारा होने के पीछे भी कुछ रहस्य हैं. दरअसल पौराणिक कथाओं की मानें तो पूर्व में समुद्र का पानी दूध की तरह सफेद और मीठा था, लेकिन समुद्र के जल का वर्तमान स्वरूप ऐसा नहीं है अब समुद्र का पानी खारा हो चुका है और यह किसी भी व्यक्ति के लिए पीने योग्य नहीं है.

शिव महापुराण के अनुसार, भगवान शिव को पाने के लिए हिमालय पुत्री पार्वती ने कठोर तपस्या की थी, उनकी तपस्या के तेज से तीनो लोक भयभीत हो उठे. जब सभी देवता इस समस्या को हल करने के लिए इसका उपाय ढूंढने में लगे थे, तब समुद्र देवता माता पार्वती के स्वरूप पर मोहित हो गए और समुद्र देव ने माता पार्वती से विवाह करने की इच्छा प्रकट की.

समुद्र देव ने महादेव को क्यों कहा भला बुरा
जब माता पार्वती की तपस्या पूरी हुई तब समुद्र देव ने देवी उमा से विवाह की करने की इच्छा जाहिर की. उमा ने समुद्र देव की भावनाओं का ध्यान रखते हुए सम्मानपूर्वक कहा कि मैं पहले से ही भगवान शिव से प्रेम करती हूं. यह सुनकर समुद्र देव क्रोधित हो गए और भोलेनाथ को भला बुरा कहने लगे. उन्होंने भगवान शंकर का तिरस्कार करते हुए कहा कि उस भस्मधारी आदिवासी में ऐसा क्या है जो मुझमें नहीं है, मैं सभी मनुष्यों की प्यास बुझाता हूं और मेरा चरित्र दूध की तरह सफेद है. हे उमा, मुझसे विवाह के लिए हामी भर दो और समुद्र की रानी बन जाओ.

माता पार्वती के श्राप से समुद्र का जल हुआ खारा
जब समुद्र देव ने महादेव का अपमान किया तो माता पार्वती भोलेनाथ का अपमान सहन न कर सकीं. इसके बाद माता पार्वती को समुद्र देव पर बहुत गुस्सा आया और इसी गुस्से में उन्होंने समुद्र देव को श्राप दे दिया कि जिस मीठे जल पर तुम्हें इतना अभिमान और घमंड है. वह जल खारा हो जाएगा और तुम्हारे समुद्र का पानी कोई भी मनुष्य ग्रहण नहीं करेगा. माता पार्वती के श्राप देने के बाद से ही समुद्र का पानी खारा हो गया और मनुष्य के पीने लायक नहीं रहा.

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प्रीति कुमारी 🥰

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