जिसने लोगो की असलियत दिखाई हैं,
वक़्त वक़्त की बात है
लोग बदल जाते है साहब
वक़्त के बदलाव से।
था वक्त जो बूरा बहुत तो
अपनो ने भी साथ छुड़ाई है,
जब सुघर गया ये वक्त आज तो
लोखों रिश्तों नातों की दुहाई है ।
जब कटे बक्त तन्हाई में तो
पहचानों अपने -आप को
जो चमक गई पहचान खुद की
फिर तन्हाई को तरस जाओगे।
इस दुनिया के लोग अधिकतर
बस वक्त देखकर जुडते है,
बस अपने मुनाफे की खातीर
मतलब का रिश्ता रखते हैं ।
वक्त बदल डालों अपना
सब साथ निभायेगे खुलकर
जोडेगे फिर अटूट संबंध ,
इनकी मतलबी निगाहों में
जब सफल पहचान बनाओगे।
ये वक्त वक्त की बात है साहब
अपना और पराया क्या।।
प्रिती कुमारी

3 टिप्पणियाँ
Nice
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएंMust👌👌👌👌👌👌👌👌👌
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