"तीज पर्व प्रेम की निशानी "

एक विश्वास का संबंध है
गहरा, अटूट, सशक्त है,
बना रहे सुहाग हर धड़ी,
ये तीज पर्व का मर्म है ।

खुदा तुझे मैं पुजती
तेरी पास मनोकामना रख रही,
मेरा प्रेम अमर रहे सदा,
सजी रहे मेहँदी, चुड़ी कंगना हर धड़ी।

मेरे जीवन की आस है
मुझे तुझपे विश्वास है,
रहे सलामत सजना मेरा,
यही मेरी अरदास है ।

मांगो की खूबसूरती,
ये कोई सिंगार नहीं 
ये तो सबूत हैं प्रेम का
जिसे बनाये रखना हर धड़ी
खुदा तुझसे मेरी हर-पल यही अरदास है ।

अचल ,दृगंचल और दृढ़ संकल्प से
कर रही हूँ व्रत आज, पूरे अंतरमन से, 
सुन लेना प्रभु अरदास मेरी 
बनाए रखना मेरा सुहाग सदा
रहे सदा सलामत सजना मेरा ।

मांग में सिंदूर सजाई हूँ 
हाथों में खनक रही कंगना, 
रची है हाथों में मेहँदी भरके, 
ये बस बना रहे जीवन भर
करती रहू सारे सिंगार हरपल
खुदा बनी रहे ऐसी ही आशीष 
आपकी मेरे सजना पे हरदम।

किया था तीज माँ पार्वती ने
अपने प्रेम को पाने को,उसी तरह, 
आज व्रत कर रही हूँ विश्वास से, 
पति के प्रेम -सौहार्द्य में,
बना रहे सजना का घर -आंगन
अमर रहे सुहाग हरदम।

                         प्रीति कुमारी 





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