"आरक्षण में बदलाव जरूरी है"

कम मेहनत में उँचा पद देते हो
मेहनत करनेवाले का मनोबल गिराकर,
कहते हो बराबर का हक दिलाना है
पर सच तो ये है कि ये वोट पाने का बहाना है ।



परीक्षा में, नौकरी में, पैसो से,
हर कदम पे हैं आरक्षण,
समझ नही आता उन्हें उठा रहे हो या
सामान्य वर्ग को गिरा रहे हो।

प्रयास जारी है तुम्हारी, आरक्षण बढ़ाने की
पर याद रखो ये कोई जरीया नहीं है
किसी को उठाने की, बस यह प्रक्रिया है
वोट बैक बढाने की।

देना है आरक्षण तो दो बेसक
उठाओ उन्हें, पर आय को आधार बनाओ,
कब तक चलेगा यह व्यवस्था
बदलो इसे और परिवर्तन लाओ।

ऐसे कैसी व्यवस्था है, हर कदम पे आरक्षण है
फीस कम उनकी ,मार्क कम उनका,
नौकरी में पदोन्नति उनकी, हर जगह सुविधा उनको
तो क्यो ना बोले सामान्य वर्ग,
क्या सामान्य वर्ग मे कोई गरीब नही
क्या सामान्य को नौकरी की अर्ज नहीं ।

यही चलता रहा सिलसिला तो
कभी बराबरी का हक ना उन्हें देे पाओगे 
जो भर रहा है भरास दिल में उसे निकाल नहीं पाओगे
बेहतर होगा बदलाव लाओ इस व्यवस्था में
आरक्षण का आधार आय बेस बनाओ,
ना कि वोट बैक का स्वांग रचाओ।

बदल रहा है वक्त ये बदलाव भी जरूरी है
पा लिया है उस वर्ग ने भी बहुत तरक्की 
आय के आधार पर आरक्षण का लाना जरूरी है ,
जो उठ चुके उन्हें ही उठाने का नहीं
जिन्हें वास्तव में जरूरी है उन्हें आरक्षण देकर
उठाना ,बढाना,और बराबर का सम्मान दिलाना
जरूरी है, आरक्षण में बदलाव जरूरी है ।

                                    -प्रीति कुमारी 

 

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