वक्त बेवक्त यू ना तुम आया करो
यू आ-आकर ना यू तरपाया करो,
जो यादे हो गई है धुधंली,
उसे फिर से ना याद दिलाया करो।
बड़ी मुश्किल से उसे संजोया है
हर आस से उसे भिंगोया है,
मुझे रूक -रूक के ना आजमाया करो
तुम यू धड़ी - धड़ी ना याद आया करो।
बेसक तेरी फितरत में हैं ये आदते
इस धड़ी जाना, उस धड़ी वापस आना,
पर ना कर ये नदानिया,
पल भर में भूलने वाले,
कभी भी ना वापस आया करो।
खुद की तरह ही सारी यादें भी ले जा
जब तु नहीं तो, तेरी यादों का क्या,
ले जा अपनी सारी निशानिया
घड़ी - धड़ी ना अपनी आदते याद दिलाया कर।
आज फिर से कसक उठी थी यादों की
तेरी हर यादे हिलोरे ले रही थी,
क्षण भर गुमशुम सा खो गया था उसमें,
महसूस तेरी एहसास हो रही थी ।
कब तक चलेगा ये सिलसिला
कुछ तो बदल जा अपनी तरह,
यादें तो तेरी मुहब्बत से भी गहरी निकली
पल भर भी ना छोड़े मेरी गली।
सलाम तेरी एहसासो को
बिदा करती इस दिल से हूँ,
एक आखिरी नज्मा है तुझसे
जिस तरह गया तू जीवन से
वैसे ही लेजा यादें अपनी,
यूं धड़ी -धड़ी ना आजमाया करो
तुम पल भर भी ना याद आया करो।
प्रीति कुमारी

5 टिप्पणियाँ
Nice
जवाब देंहटाएंNice di
जवाब देंहटाएंNice 👌👌👌👌👌👌
जवाब देंहटाएंSupper
जवाब देंहटाएंThnku so mch
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