ख़्वाब को संन्जोए हुए
ना राह है, ना फलसफा
सिर्फ आस है ए जिंदगी ।
कभी इस जहाँ कभी उस जहाँ
दिल का भ्रमण है हो रहा
बस वक्त की तलाश में
तेरी फिक्र हैं ये जिंदगी ।
कदम -कदम तू आजमा रही
धड़ी -धड़ी सता रही,
कही गिर रहा, कही गर रहा
बस हौसला संभाले खरा
तुझ संग हरपल गुजर रहा ।
कभी तो यकी दिला मुझे
कभी तो साथ निभा जरा
क्यों ले रहा है करवटे
क्यों है तुझे इतनी रंजीसे ।
शिकायतें तो तुझसे लाख है
ये जिंदगी सब तेरा ही करामात है,
कोई बिखर रहा कोई निखर रहा
ये कैसा तेरे इंसाफ है ।
कितना यकी दिलाउ खुदको
कि आयेगा वक्त मेरा भी
जब कदम -कदम पर है रूकावटे
जब साथ ही ना तेरा मिले
हां है तुझसे कई शिकायतें
जीवन की इस राह में।
ब्या ना कर पा रहा
हर जख्म हर रंजीसे
दिल पल -पल है सह रहा
तेरे हर कसर हर ख्वाहिशे।
कब तक जले इस आस में
कि तू होगा एक दिन साथ में,
ना होगी गुमनाम पहचान मेरी
तु रखेगा मुकम्मल इसे ।
एक आस है तुझसे ए जिंदगी
तेरा साथ हर पल मिले,
शिकायतें तुझसे तो लाख है
ये जिंदगी सब तेरा करामात है ।।
प्रीति कुमारी

6 टिप्पणियाँ
Nice 👌👌👌
जवाब देंहटाएंSupper
जवाब देंहटाएंNice di
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएंउत्तम प्रयास
जवाब देंहटाएंThnku so mch everyone
जवाब देंहटाएं