आप सभी को पुत्री दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ,हम 21वीं सदी में आ गए हैं, पर आज भी बेटियों को उनका हक और सम्मान नहीं मिल रहा, कही जला दी जा रही, तो कही जन्म से पहले ही मार दी जाती हैं, एक बदलाव की सक्त जरूरत है, ना अन्तर करें इनमे ये खुदा की दी हुई खूबसूरत कृति है और भगवान उन्हें ही देता है बेटी जो सौभाग्यशाली होते हैं, दहेज जैसी कुप्रथा का असर भी हमारी बेटियों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाल रही है, इसे खत्म करने के लिए बेटियों के माता -पिता को जागरूक होने की जरुरत है ,जब तक आप दहेज देते रहेगे बेटियाँ असुरक्षित ही रहेगी।आज की कविता दहेज कुप्रथा आधारित है।
"समााप्त करें इस कुप्रथा को"
मेरे घर के पास की गलियों में
एक सुबह जब प्रज्वलित हुआ
एक भाव-भंगिमा किलकारी ने
है मेरे मन को मोह लिया।
एक पुत्री रत्न ने जन्म लिया
घर में ज्योति कुचिंत है
सब प्रसन्न होकर बोल रहे
खुदा ने मेरी मनोकामना सुन ली है ।
मैं भी बेचैन हो उठा उसके दर्शन को
एक रूप दुर्गेश्वरी आई है
शायद इस घर से खुश होकर
देवी माँ ने पुण्य का फल भेजा है
इसलिए तो इस घर ने पुत्रीधन पाई है ।
बहुत लाडली गुड़िया ये
सबके दिल में बसती है
बड़ी योग्य हैं सारे कामों में
हर जगह नाम उज्जवल करती हैं
जब बड़ी हुई स्नेहो में पलकर
वक्त जुदाई की आई थी
एक योग्य वर ढ़ुनढ़कर
उसके पिता ने उसकी ब्याह रचाई थी।
हर एैस अराम से पलने वाली बेटी को
एक माता -पिता ने बिदा किया
दहेजो की हर मांगो को
उम्मीद से ज्याद है दिया।
बेटी खुश रहे अपने घर में
ये सोच के सारी ख़्वाहिश पूरी की
ससुराल वाले भी खुश थे
मेरी बहु को कितने धन है मिले।
कुछ दिन चला सब ख़ुशी -खुशी
फिर कई शिकायतें है आने लगी
हर तरह से योग्य कन्या में
लाखों ही कमी गिनाने लगे।
हर वक्त बढ़ रहा था उनका अत्याचार
सहते-सहते थी गुड़िया लाचार
पैसो के भूखे सास-ससूर ने
हर -पल उसे धमकाया था
लाचार बेबस उस कन्या ने
अपने आँसू को धड़ी-धड़ी छुपाया था।
एक दिन अत्याचार की सीमा को
तोड़ दिया उन दरिंदो ने
धूप में ना निकलने वाली कन्या को
जलती चिता की अग्नि में हैं झोक दिया।
हर वक्त उसकी आँखों में
एक उम्मीद जगी थी जीने की
बाबुल मुझको बचा लो
मैं जिंदा ही जल रही हूँ चीता में
किसी को भी ना दया आई
ये दहेज के लोभी कुत्ते थे।
चली गई बेटी फिर इस तरह
इस लोभ मोह की नगरी से
खुदा तुम ही करो कुछ इन लोभियो का
जो कुकर्म करके सरमाते नहीं।
या तो बेटी को ही ना भेजो इस जहाँ में खुदा
इतने दर्द उठाने को ,
आप सबसे मेरी गुहार है
आवाज़ उठाए ऐसे मौको पे
ये भी अपका अधिकार है ।🙏🙏
-प्रीति कुमारी



5 टिप्पणियाँ
Super
जवाब देंहटाएंMust👌👌👌👌
जवाब देंहटाएंNice
जवाब देंहटाएंSuper👌👌👌👌👌👌👌👌👌
जवाब देंहटाएं👌👌👌👌👌👌👌👌👌👌
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