"गुरूर किस बात का है तुझे" (तेरे जैसे बहुत गए बहुत आयेगे)

 
मत कर गुरूर इतना
कि अहम सर चढ़  जाए
रख हौसला इतना कि
सारे सपने सच हो जाए ।

गुरूर को तो तोड़ने को
अवतरण ले भगवान आये हैं
ना करना कभी अतिशय गुरूर
इसके भयावह अंजाम आये हैं ।

गुरूर की गुरूरता का क्या है
बढा ले जितना तु चाहे
पर रख यकी एक दिन
धराशाही होगा तु धरा पर ।

बड़े लोग इस जहाँ में
अहम कि दरिया में डूबे थे
पाल बैठे थे गुरूर अपने
सर्वोच्च होने के, ना कर गुरूर इतना
कि सारी दुनिया उजर जाए
रख हौसला इतना कि
सारे सपने पूरे हो जाए ।

किस बात कि गुरूरता
तुने क्या ऐसा पाया है जिसमें
प्रथम भी तु है, अंत भी तु ही है
या क्या पा लिया ऐसा जो
तु साथ लेके जाएगा।

ये जिंदगी चक्र हैं कुछ भी पा जा
यकीनन सब यही छोड़ जाना है
फिर किस बात का अहम है तुझे
कि तेरी श्रेष्ठता ही उतम है ।

जहाँ में आकर तुने क्या पाया
इसकी कोई गिनती नहीं होती
ये तो बस जड़िया है 
रासलीला और कर्मलीला की
तेरे हर कर्मों का हिसाब होगा
उसमे तेरे अहम का ना कोई वजूद होगा।

खुदा तेरे हर कर्मो को गिनेगा
तेरे दौलत से उसको क्या
खुदा तेरे हौसले को देखेगा
तेरेे  गुरूर से उसको क्या।

नाम जहाँ में उसका ही अमर है
जिसने काम किया हैं औरो के लिए
और है मनुष्य जीवन उसका ही सार्थक
जिसने गुरूर त्याग रखा है हौसला हर पथ पर ।

🙏अहम कि गहराई पे हर कोई चढता ही जाता है
अनुभव होता है उसे जब तक समय निकल जाता है।❤

-प्रीति कुमारी






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