दूर तलक जाएगी ,
जब तक नहीं सुधरेगी सिस्टम
आवाज़ बढ़ती ही जायेगी,
अब आवाज़ रूक नहीं पायेगी।
सुलग रही हैं आग दिल में
इसे जलाउ कैसे,
दिन रात की है मेहनत इसे
दिखाउ कैसे,
ना परीक्षा है, ना ही मन की बात में
युवाओ की बात,
बस बच गई है केवल मन की भरास।
बेरोजगार हूँ साहब,सरकार नहीं सुनती
युवाओ की याद चुनाव में आती हैं,
जीत का चोला पहनकर,
युवा को ही मझदार में हैं डालती।
शांत बैठा था, पर कमजोर ना था
उम्मीद जगी थी सरकार से तभी तो,
पांच सौ- पाच सौ की फार्म भरी थी,
सब फार्म दिखावे थे,
पांच साल से जूझ रहे हैं साहब,
क्योंकि सरकार मन की बात करती है
पर युवाओ की नहीं ।
कब तक सहे मनमानी सिस्टम की
कब तक उम्मीद बांधकर बैठेगे,
पांच वर्ष तो बीत गई,
क्या तमाम जीवन NTPC, SSC, CGL...
अन्य सरकारी इम्तेहान को तरसेगे।
सुधार लिजिए अपने सिस्टम को
ये युवाओ का अल्टीमेटम है,
ना समझना कमजोर हमे,
वरना लोकतंत्र दिखलाऐगे,
बिना सुधारे व्यवस्था को
ये आवाज़ नहीं रूकने देगे।
"हम भारत देश के युवा है
लोकतंत्र भली- भाँति समझा देगे"।।
प्रीति कुमारी

2 टिप्पणियाँ
Nice
जवाब देंहटाएंThnx a lot
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