39-39 की दांव लगाते हो
अबरी जीत मेरी होगी
ये सोचते -सोचते लगी दांव भी हार जाते हो।
करोड़ तो आज कमाउंगा
ड्रीम 11 बाजी आज मेरी होगी
यह ख्वाब रोज सजाते हो
फिर तनिक प्वांट से हारकर
उतना धन राशि ही पाते हो
जितना तुम अपना गवाते हो।
कोई जीत जाए करोड़ो तो
तुम्हारी उम्मीद भी जग जाती है
इस जोश -जोश में आकरके
फिर से अपनी कटवाते हो।
मुख की खाकर गिरने से भी
बाज कहा तुम आते हो
ये तो करोड़ो का लालच है
जो अपनी पूंजी भी गवाती है ।
सब भाग्य -नसीब का खेल है
ये सट्टा बड़ा अजीब है
लग जाए जिसकी वो अमीर बने
इस लालच में कई अपने धन को भी गवा
गरीब और फकीर बने ।
सब नसीब का खेल है
लगे तो हीरो, ना लगे तो जीरो बनाती है
ये ड्रीम 11 कई सपने दिखाती है
और फिर उसे तोड़ जाती है
लाखो में 1 की पूरी होती है
बाकि सब की अधूरी होती है ।
-प्रीति कुमारी

3 टिप्पणियाँ
Nice 👌👌👌👌👌
जवाब देंहटाएंsuper
जवाब देंहटाएंBhot acha likhi ho aap...
जवाब देंहटाएंPadhke lga mere liye hi likha h
Kyuki
Hm v Apna kismat roj aazmate h...😁