सूरत से सब को लुभाई माँ
एक तेज आ रही थी सूरत से
जो मन मोह ले गई सब भक्तो की।
दरबार सजी थी फूलो से
मन -मस्त मगन सब थे नाच रहे
आजा माँ के बुलावे से
माता भी पट खोलकर झाँक रही।
दिव्यप्रकाश थी मईया की
सब देख उसी में, खो से गए
दर्शन तेरी करता रहूं
चरणों में तेरे बैठा रहूं
सब यही सोच में खोए खड़े।
आँखों का काजल, कानो की कुण्डल
नाको में नथिया सजाई है
मईया मेरी तेज है वो
जिसने सबकी होस उड़ाई है ।
सुन्दरता की कोई तुलना नहीं
वो अपरंपार सुंदरी है
उसपर से उनकी सर की चुनर ने
पंडाल की रौनक बढ़ाई है ।
तलवार,त्रिशूल बरछा, चक्र
हाथों में अपने सजाई है
वो नारी की अवतार है पर
शक्ति की प्रकाष्ठा है
थर -थर कांपे भूधरा पर पापी
माईया इतनी तेजस्वनी हैं ।
मोहनी मुरत मईया की
आज देख मन है झूम रहा
मैं करती रहूं तेरी चरण वंदना
ये मन प्रफुल्लित हो था बोल रहा
सजी रहे यूँही तेरी दरबार मईया
बना रहा सदा सभी भक्तो पर तेरा प्यार मईया।
❤🙏चहूं ओर तेरा जयकारा है
शेरो वाली मईया का ही अब सहारा है 🙏❤
-प्रीति कुमारी

3 टिप्पणियाँ
Jaii mata dii🙏🙏🙏🚩🚩🚩🚩🙏🙏🙏
जवाब देंहटाएंVery nice
जवाब देंहटाएं🙏🙏🙏🙏🙏super🙏🙏🙏🙏🙏
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