"अपने हालात से बनते है जज़बात से नहीं "

आप क्या हो ?
ये केवल आप जानते हो ,
दूसरे तो बस आपके अच्छे हालात में साथ निभाना 
और मुश्किल हालात में उड़ाना मजाक जानते हैं ।

सच से लाख करवटे फेड़ो बदल नहीं जाएगी
कितना भी कर दो किसी को,
बूूरे वक्त में पलट  ही जायेगा
दिखाऐगा अपनी पहचान 
जो छुपाए बैठे था वर्षों तलक तेरी अमीरी में ।

अपनो की सहगरमी तले ,हर कोई लूटता जाएगा
दिखावे की सारी प्रकाष्ठा पार कर जाएगा
एक आवाज केवल उठते ही
ख्वाहिशे सारी पूरी होगी
सुनवाई सारे चाहतो की पलभर मे मंजूरी होगी।

तुम क्या हो ?
तेरी अमीरी-गरीबी बेहद महत्व रखती है
इस जहाँ में रिश्ते निभाने को
केवल दौलत मायने रखती है 
इस जहाँ में अपने बनाने को।

पद-प्रतिष्ठा, ग्यान -सम्मान 
बस इसकी पूजा होती है 
आज के बदलते  समाज में
बददस्तूर पैठ गया है  जन -जन में 
केवल  पैसे वाले की पूजा होती है
मुश्किल मे नहीं देता  साथ कोई।

पैसे हैं तो अपने है,
तेरे गलत कर्म भी सही है फिर 
तेरी झूठी बाते भी सच्ची है
नैतिकता मर रही जग में
इस लोभ मोह की कलयुग में।

वक्त बदलते बदल जाते ये लोभी
वक्त बनते साथी बन आते हैं 
सोच विचार तुम्हें है करना
कि कौन व्यकित्व है लायक अपने 
किन्हे सम्मान देना है जीवन में  ।

                                 -प्रीति कुमारी 



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