आज मेरा हैं कल तेरा आयेगा बुढ़ापा तो सच्चाई है कौन इससे बच पायेगा

संभवतः तेरी चाहत से बंधे है
वरना यूं गम सहकर तेरे साथ ना होते
परवरिश को कोसते है अपने
शायद गलत दे दी, वरना ऐसे हालात ना होते।

तुु गुरूर में है ,आज अपनी जवानी के
हकीकत से तेरा वास्ता नहीं
वरना समझ जाता, ये तो जीवन चक्र हैं
आज मेरी है, कल तेरी आयेगी सहारे की धड़ी।



बरपन्न तो मेरा है, प्यार तो मुझे है तुझसे
इसलिए सह रहा, इसलिए अकेला हूँ
वरना जिस घर से निकाल दिया तुमने
वो घर भी मेरा हैं, वो धन भी मेरी है।

कभी तेरी जरूरतो के लिए
अपने हर शौक को मारा था मैने
तुझपर  सारी खुशियां लुटाया था मैने 
बुढ़ापे का तु सहारा, तु गौरव अभिमान बनेगा।

सारी कसर जुटा दी थी
तेरी तरक्की पाने को
आज तु इतना तरक्की कर गया
इतना सौहरत पा लिया कि
घर में तेरे जगह ही नहीं 
बुढ़े माँ -बाप को सुलाने की ।

मुझे मेरे ही घर से निकाल रहा
मेरे जीवन भर कि कमाई को 
अपना बताकर इतरा रहा
अपने बच्चों पर सारी खुशियां लुटा रहा 
माँ -बाप को वृद्धाआश्रम पहुँचा रहा।

जवानी के जोश में तु भूल गया है 
जीवन लीला को, घमण्ड ना कर इस जवानी पर
आज मेरा हैं ,कल तेरा आयेगा
जो तु कर रहा आज मेरे साथ, 
यकीनन कल अपने बच्चों से तु वही पायेगा
जैसा बोयेगा, वैसा ही काटेगा
ये तो जीवन चक्र हैं, इससे कहाँ कोई बच पायेगा।

                                -प्रीति कुमारी 





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