कहते हो वक्त नहीं
रखने लगे हो दिल में उस गैर को
कहते क्यों सच नहीं ।
माना छुपाना हैं मुहब्बत
दिखाना तुम्हें सरेआम नहीं
पर झूठ की कोई औकात नही
सच की कोई बंदिशे नही।
तेरे जुबा से ज्यादा
तेरी आँखों को पहचानता हूँ
बदल तो गई है तू,दिमाग जानता है
पर दिल नहीं मानता है ।
मिले मुहब्बत मुझसे बेहतर
तो बेसक चली जाना तुम
पर ऐसा ना हो मेरी जान
मेरा दिल तोड़ते -तोड़ते
अपना दिल तुड़वा लाना तुम ।
हम तो तेरे काबिल नहीं शायद
ये सोच के रह लेगे,जी लेगे
पर तुम बाद में ना पछताव कही
सच्ची मुहब्बत गवा कर।
मुहब्बत कि कसम चले गए तो
वापस ना आऐगे,
चाहे हर धड़ी तेरी याद में
रोकर ही क्यों ना बिताऐगे।
प्रिती कुमारी

3 टिप्पणियाँ
Super
जवाब देंहटाएंSuperb... Bilkul shi...
जवाब देंहटाएंBhot acha likhi ho.... Continue Rakho... Ese
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