कहने को तो कई दोस्त रिश्तेदार है
हमारे भी इस जहाँ में
पर सारे ही बेपरवाह से कुछ कम नहीं।
कोई ना मिले तो गम नहीं
शिकवा करे तो गम नहीं
दर्द तो तब होता है
जब कहे जुबा से अपना
और समझे मुझको कुछ नहीं ।
कोई गम दे तो सह लेगे
कहेगे कुछ भी ना उनसे
सब सुन लेगे सह लेगे
पर मुँह से कुछ ना कहेगे।
आज बारी उनकी है
तो पारी भी उन्हें ही देगे
जब आऐगा मौका मेरा भी तो
यकीनन बदला भी जम कर लेगे।
आज बूरा लग रहा है
कल आदत हो जाएगी
तब तक कई लोग
निगाहों और दिलो से दूर हो जाएगे
और तन्हाई की लत भी लग जाएगी।
प्रीति कुमारी

2 टिप्पणियाँ
don't be afraid to be alone. goals are personal!!
जवाब देंहटाएंSuper
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