एक कोशिश करते हैं रिश्ते बचाने की

चलो आज किसी को आजमाते हैं
कहते हैं जा रहे है छोड़कर तुझे
ना आऐगे कभी भी मुड़कर
जी लो अपनी जिंदगी खुलकर ।

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धबड़ाऐगा ,रोकपाऐगा,
या जशन शाम में डूब जाऐगा
चलो आजमाते हैं एक बारी
बिना आजमाये कहां सच सामने आएगा।

मुहब्बत की गहराई कितनी हैं
हम सिर्फ तुम्हारे हैं,
इस अल्फाज में सच्चाई कितनी हैं
ऐसे कहाँ समझ आ रहा।

मौसमों से भी तेज
तेरी हरकतो में बदलाव हैं
या तो बदल गया है या कोशिश लगातार हैं
चलो एक बार आजमाते हैं
हम जा रहे हैं तेरी जिंदगी से दूर
ये कह कर चले जाते हैं ।

आ जाए अगर बिना गिला -शिकवा
तो इश्क हमारा हैं, जो ना आए 
ना आज हमारा हैं, ना कल तुम्हारा हैं 
बस यूं समझ लो फिर जहाँ वालो
एक आवारा सा बंदा है 
ना इसकी कोई गली हैं ना ही कोई किनारा हैं 
अभी -अभी ये उपजा है और
गुरूर में पड़ा एक बेचारा है ।

                               प्रीति कुमारी 

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