आस मन की ना हारिए (एक आस ही है जिंदगी)

हैं जर्रा जर्रा निर्जर पड़ा
पथ हर गली हर मोड़ का
कल शोर था जिस राह पर
वो सुनसान है किंचित खड़ा
जहाँ कोई पथिक तक ना है दिख रहा।

https://www.papakiparihu.com/2021/05/blog-post_22.html

कोई दरिया भी नहीं 
कोई किनारा भी नहीं 
क्या तेरा और क्या मेरा
जग में कोई सहारा भी नहीं ।

हलचल समाई मन में है
कई घर तबाही की दलदल में है 
खो गए इस प्रलय में बहुत
दुख की परछाई घर -घर में है ।

फिर भी उम्मीद को ना हारिए 
हौसला जुटाए  रखिये
फिर गली चहचहाएगी
हम सब फिर से वापस आएगे
मिलके सब मुस्कुराऐगे।

होगी गली में स्कूल बस
सुनसान राह भी गाएगी
कोई रोक ना होगा निकलने पर
फिर से शहर जगमगाएगी।

बांधे रखिये अपने हौसले को
टूटने ना दीजिए विश्वास को
इस कठिन दौड़ में
एक आस ही है जिंदगी

प्रीति कुमारी


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