फिर से कसीस सी छाई हैं
ख़्याल आ रही हर धड़ी तेरी
तेरी शुरूर रग -रग में समाई है ।
तू अलग नहीं इस जग से
पर खास लग रहा हैं मन ही मन
सोच में तेरी डूबी हूँ हर दम
तू बस सा गया है नयन दर्पण ।
तू उम्मीद बन रहा सूने जीवन का
तेरे साथ बीता हर लम्हा
बड़ी राहत हैं पल की गहराई में
तू खास बन रहा है मेरे दिल में
तू मेरे सूने पल की उमराई हैं ।
इश्क़ के दुआ का फल हैं तू
तू रहमत हैं मेरे सूने जीवन की
बात करू बस साथ रहूं हरदम
यही है आरजू इस जीवन की ।
प्रीति कुमारी

2 टिप्पणियाँ
Nice
जवाब देंहटाएंVery nice ❤️
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