जज़बातो में तेरे धोखे थे

चाहत पर तेरे ऐतवार हो गया था
सच कहते हैं हमे तुमसे प्यार हो गया था
जज़बातो में तेरे धोखे थे बस
अफ़सोस इसी बात का रह गया।


यूं शांत करके चला गया
मुझको अंदर हीअंदर तोड़ गया
खता तो ना थी हमारी उनसे इश्क़ करना
शुरूआत उसने ही कि फिर वही छोड़ गया।

यूं अकेलेपन से नफरत सी थी मुझे
आज अकेले ही सुकून मिलता है
कल तक तन्हाईयों में भी शोर थी मेरे
आज शोर में भी तन्हाई लगती हैं ।

जाना तेरा नही खलता
तेरी यादे तड़पाती हैं
चाहूं भी तो निकल ना पाउ इन यादों से
गहराई में हरवक्त डूबा ले जाती हैं ।

सुकून तुम्हें तो मिला होगा
मेरा यकीन तोड़कर
मेरा साथ छोड़कर
मेरे प्यार से मुँह मोड़कर
चलो खुश रहो सदा तुम
ये दुआ करेगे रब से हाथ जोड़कर।

प्रीति कुमारी


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