तेरी यादों से अब

तेरे दिये दर्द से अब कारोबार करते हैं
अब गम नहीं तेरे जाने की
जो महसूस करते हैं
उससे अब अल्फाज लिखते हैं ।

सहन -वहन अब कुछ नहीं
दर्द से अब रिश्ता रखते हैं
कोई पूछता हैं जब तेरे बारे में
मुस्कुराते है और कहते हैं
वो आज भी दिल में कदम रखते हैं ।


जब खोता हूँ तेरी यादो में
जब तू ही तू समाता है जहनो में
यादो के सैलाबो में डूबाकर फिर
यादों को लिखता हूँ ।

कितने हसीन थे वो पल
जब तुम यादो में नहीं हकीकत मे थे
कोई वहम ना था दिल में
तुम दिल की धड़कन में थे।

अब वहम ही अच्छा है 
तुम मिलो ना मिलो कभी
तेरे साथ से कही ज्यादा 
तेरा याद ही सच्चा  है 
यादो में वेवफाई नहीं होती 
आती हैं हर वक्त हर पल
कभी यादों से जुदाई नहीं होती।
         प्रीति कुमारी 






एक टिप्पणी भेजें

2 टिप्पणियाँ