बड़ी सिद्दत से जिदंगी मे आते हैं
रफ्ता रफ्ता दिल में समाते हैंबढ़ा कर दरिया मुहब्बत का
फिर तन्हा छोड़ जाते हैं ।
जिससे कभी बात नहीं होती थी
उसका एक दिन भी नहीं बात करना
कुछ पल की ही सही मुलाकात नहीं करना
फिर बेचैनी बढ़ाता हैं,मन उदास कर जाता है ।
मुहब्बत जता कर लोग बदल जाते हैं
पर ये दिल उनकी वही चाहत को
बार -बार चाहता है, बार -बार मांगता हैं
उसकी चाहत इस कदर दिल में बस जाती हैं ।
कुछ यादे, कुछ बाते, कुछ लम्हे
यादगार बना जाते हैं
मुहब्बत के नाम पर
लोग तन्हा कर जाते है ।
प्रीति कुमारी

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Rgt
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